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हालात:  इस सीमांत जिले में है बाल रोग विशेषज्ञों का टोटा, सात पद चल रहे हैं खाली

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 मात्र जिला चिकित्सालय में एक डाॅक्टर तैनात

तीसरी लहर से निपटने को नहीं दिख रहे पुख्ता इंतजाम 

सीएमओ का दावा,10 सीएचसी व पीएचसी में बच्चों के वार्ड बनाने की है तैयारी

दीपा झिंक्वाण बिष्ट 
ग्वालदम, 29 मई।

खुदा न ख्वास्ता कोरोना की तीसरी लहर उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों तक पहुंची तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। क्योंकि पहाड़ों में बाल रोग विशेषज्ञ डाॅक्टरों का टोटा बना हुआ है। विदित हो कि तीसरी लहर को चिकित्सा विशेषज्ञों ने बच्चों के लिए खतरनाक बताया है। अगर अकेले चमोली जिले की बात करें तो यहां मात्र जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में ही एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की गई है। जबकि पूरे जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में 8 पद सृजित हैं। यानी यहां 7 बाल रोग विशेषज्ञों के पद रिक्त चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में दो बाल रोग विशेषज्ञों के पद सृजित किए हैं।

इस तरह कर्णप्रयाग सीएचसी, गैरसैंण, थराली, घाट, पोखरी और जोशीमठ में एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ के पद सृजित किए हैं। लेकिन इन अस्पतालों में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इसी से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग और सरकार पहाड़ों में लोगों की सेहत की हिफाज़त को लेकर कितनी लापरवाह है। जबकि चमोली जिले में शून्य से लेकर 17 आयु वर्ग की जनसंख्या करीब 1 लाख 16 तक है। इतने बच्चों का इलाज करने के लिए सरकार के पास कोई पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि चमोली के प्रभारी सीएमओ डाॅक्टर एमएस खाती का कहना है कि जिले के सभी 10 सीएचसी और पीएचसी में बच्चों के वार्ड बनाने की तैयारी की जा रही है। बीमारी होने पर उपकरण और बच्चों को दवाइयों के लिए चिकित्सा निदेशालय से मांग की गई है। बहरहाल, कोरोना संकट के इस दौर में जिले के अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का होना, बच्चों की सेहत से खिलवाड़ करना ही कहा जा सकता है।