Home उत्तराखंड रामनवमी पर होगा मां कालिका मंदिर में ध्वजारोहण

रामनवमी पर होगा मां कालिका मंदिर में ध्वजारोहण

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देहरादून। पंचम नवरात्रि मां कालिका का अभिषेक कर उन्हें नीले रंग के वस्त्र धारण कराये गए।
मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा मंदिर में सभी देवी देवताओं को आमंत्रित कर उनका पूजन किया गया जिसमें सर्व प्रथम गणेश पूजन, माँ कालिका जी का पूजन, घंटी पूजन, शंख पूजन, सूर्य पूजन, गणेश पूजन लक्ष्मी पूजन, व नवग्रह पूजन अनादि देवताओं का पूजन पुजारी द्वारा किया गया। मंदिर में 27 ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ व जाप प्रातः एवं सायंकल दोनों समय हो रहा है।
मंदिर के पुजारी चंद्र प्रकाश ममगई जी द्वारा मां कालिका यज्ञशाला में दैनिक यज्ञ के साथ आज दुर्गा सप्तशती गायत्री मृत्युंजय, श्री विष्णु सहस्रनाम, नवग्रह अनादि मंत्र के माध्यम से समस्त विश्व कल्याण हेतु उपद्रव शांति हेतु आहुतियां प्रदान की गयी।
आज मंदिर प्रांगण में 3 दिवसीय शत्तिफ महासम्मेलन आरंभ हुआ जिसमें सभी संतो ने अपने विचार रख। इस दौरान बताया कि 68वां ध्वजारोहण महोत्सव शत्तिफ महासम्मेलन आज प्रातः दैनिक कार्यक्रम के बाद गीता एवं रामायण पाठ के साथ त्रिदिवसीय शत्तिफ महा सम्मलेन के साथ प्रारम्भ हुआ। कुरुक्षेत्र से स्वामी शुक्रदेवाचार्य महाराज, अहमदाबाद से स्वामी सर्वेश बापू महाराज, दिल्ली से स्वामी हरि ओम काका महाराज ने इस सत्र की शुरुआत की शत्तिफ तत्व पर अपने अपने विचार रखते हुए बताया कि इस स्थान पर पूज्य महाराज श्री ने 68 वर्ष पूर्व जो वृक्ष लगाया उनके फल रूप में संत यहां पधार कर इस वाटिका को सुगन्धित कर रहे हैं। कृष्ण और कृष्णा शत्तिफ स्वरुप में केवल इसी स्थान पर विराजमान हैं। कृष्ण आकर्षण प्रदान करते हैं। कृष्णा महाकाली का स्वरुप है। दोनों को एक ही स्थान पर मिलाना संत कृपा से संभव है।
कहा कि दोनों का स्वरुप शत्तिफ सम्मलेन है अपनी आतंरित्तफ शत्तिफ को जगाना संतों से सीखा जा सकता है स इस सृष्टि को ब्रह्मा जी ने उत्पन्न किया, विष्णु जी पालन कर रहे हैं। इसका लय शंकर करते हैं। इन सबका तत्व एक है कि परमात्मा शत्तिफमान सब प्राणियों के मध्य में है। जरूरत तो पारखी नजर की है यह नजर केवल संत कृपा एवं इस प्रकार के आयोजन से संभव है। इस प्रकृति को मातृत्व रूप में मानना शत्तिफ सम्मलेन है। मां की अष्ट भुजायें कृष्णा काली है। कृष्ण का जन्म अष्ट्मी को होना संयोग है। प्रकृति को मां के रूप में देखने का काम ही राम का स्वरुप है। इसीलिए भवन पर राम नवमी के दिवस ध्वजारोहण होता है।