राहतः जनरेटर का विकल्प बन रही है बैटरी, पर्यावरण भी बचेगा

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    संवाददाता
    नई दिल्ली, 28 अक्टूूूबर।   बिजली नहीं होने पर जनरेटर के भरोसे रहने वालों के लिए राहतभरी खबर है। अब जनरेटर का विकल्प बैटरी बनने जा रही है, जो 20 साल तक खराब नहीं होगी। अस्पताल, घर, गांव और सोसायटी भवन आदि में बिजली के लिए जनरेटर का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा। आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों की टीम ने पांच साल के शोध के बाद वेनेडियम रिडोक्स फ्लो बैटरी (वीआरएफबी) तैयार की है। खास बात यह है कि इस बैटरी से किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होगा।
    आईआईटी दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अनिल वर्मा के मुताबिक दिल्ली एनसीआर समेत अधिकतर शहरों के लोग इन दिनों प्रदूषण से परेशान हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण जनरेटर के प्रयोग पर भी रोक लगा दी जाती है। क्योंकि जनरेटर चलाने के लिए डीजल का प्रयोग होता है और इससे ध्वनि और वायु प्रदूषण होता है। इसी परेशानी को देखते हुए पांच साल पहले जनरेटर के बिना बिजली पाने का विकल्प तलाशने पर काम शुरू हुआ। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से इस शोध के लिए फंड मिला था।

    यह होगा बैटरी का काम
    प्रोण् वर्मा के मुताबिक वीआरएफबी में वेनेडियम इलेक्ट्रोलाइट नामक केमिकल डाला जाता है। सोलर पावर के माध्यम से इसे चार्ज किया जाएगा। यह डीसी पावर बैटरी होगी। इसे डीसी से पावर इलेक्ट्रानिक सर्किट की मदद से एसी में तब्दील करके घरों, अस्पताल, गांव, भवन आदि में प्रयोग किया जा सकेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्ज करने में भी इसका प्रयोग संभव होगा। इस शोध के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए भी आवेदन किया है।