सवाल : इतना सन्नाटा क्यों है भाई,…चीन के लिये जासूसी में धरा गया देशभक्त पत्रकार!

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     राजीव शर्मा की बजाय राशिद शेख होता तो..?
    (ये सवाल बहुत विवशता में पूछा है)
     कहाँ हैं माननीय आईटी सेल, ट्रोल आर्मी वाले?
     ख़ बर ये है कि दिल्ली के स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ़्तार किया है। उनके साथ एक चीनी महिला और एक नेपाली नागरिक भी पकड़े गए हैं।
    राजीव शर्मा NSA अजीत डोभाल के विवेकानन्द फाउंडेशन से बरसों से सम्बद्ध रहे हैं। वह घोषित बीजेपी, मोदी-शाह समर्थकों में शुमार हैं।।
     राजीव शर्मा पर आरोप है कि वो गोपनीय सरकारी दस्तावेज़ चीन की ख़ुफ़िया एजेंसी को मुहैया करवाते थे। उसकी एवज़ में उन्हें अब तक लाखों रुपये मिल चुके हैं। यह गिरफ़्तारियां ऑफीशियल सीक्रेट एक्ट के तहत हुईं हैं। स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव ने बताया है कि राजीव शर्मा सन2016 से चीन की ख़ुफ़िया एजेंसी के लिये काम कर रहे थे।उन्हें प्रत्येक गोपनीय सूचना पर हज़ारों रुपये मिलते थे। यादव का कहना है कि उन्हें अब तक 40 से 50 लाख रु मिल चुके हैं।
    राजीव शर्मा के लेख चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स तक में छपते थे। कौन है राजीव शर्मा…? स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा घोषित रूप से संघ, बीजेपी, मोदी-शाह का समर्थक हैं। पिछले कई वर्षों से उनके समर्थन में लेख लिख कर अभियान चलाते रहे हैं। उनके ख़ुद के वेब पेज़ पर सारी सामग्री इन्हीं लोगों के पक्ष में भरी पड़ी है।
    देशभक्ति के स्वयंभू पैरोकार , पत्रकार राजीव शर्मा स्थानीय मीडिया संस्थानों में भी मोदी शाह के चारण गान के लिए जाने जाते हैं।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के एनजीओ ‘विवेकानन्द फाउंडेशन’ में वर्षों से सक्रिय थे।जासूसी में उनकी गिरफ़्तारी के बाद आनन फानन में फाउंडेशन की वेबसाइट से उनसे संबंधित सभी सामग्री हटा दी गयी है।

    सवाल पूछा जा रहा है कि क्या विवेकानंद फाउंडेशन या उसमें शामिल कोई और भी इस जासूसी में शामिल है?

    सवाल यह भी है कि रक्षा संबंधी गोपनीय जानकारियां राजीव शर्मा तक कैसे पहुंचती थीं?
    वे कौन लोग हैं जो गोपनीय दस्तावेज़ उन्हें मुहैया कराते थे? क्या वे नाम कभी सामने आएंगे?

     और आख़िरी सवाल..

    देशभक्ति के स्वयंभू ठेकेदारों के कुनबे से इस जासूसी पर कोई आवाज़ क्यों नहीं उठ रही?
    अगर राजीव शर्मा की बजाय आरोपी का नाम राशिद शेख होता तो???
    (काश हमें कभी ऐसे सवाल नहीं पूछने पड़ते… लेकिन आपने महामारी तक को एक धर्म के नाम से जोड़ कर नफ़रत परोसी है, इसलिये हम मजबूर होकर पूछ रहे हैं। माफ़ी)
    तो क्या…तो अब तक आईटी सेल, ट्रोल आर्मी तांडव नृत्य कर रहे होते।
    लगता है ‘आपला मानुष’ है इसलिये ऊपर से खामोश रहने का हुकुम हुआ है।
    फिर भी सवाल तो पूछेंगे..इतना सन्नाटा क्यों है भाई..?

    (डॉ. राकेश पाठक की सोशल मीडिया पोस्ट)