स्मरण: हिटलर का ऑफर ठुकराने वाले असली देशभक्त हाॅकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद

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    वे आज तक भी दुनिया के सबसे महानतम् हॉकी खिलाड़ी माने जाते हैं। उन्होंने अपने 22 साल के कैरियर में अतंरराष्ट्रीय हॉकी में 400 गोल दागकर दुनिया को हैरान कर दिया था।

    उनकी कप्तानी में भारतीय हाॅकी टीम ने 1928 में उसके बाद 1932 में और फिर तीसरी बार 1936 में ओलम्पिक गोल्ड मेडल हासिल किए।

    बर्लिन ओलिंपिक में मेजर ध्यानचंद के शानदार प्रदर्शन से प्रभावित होकर हिटलर ने उन्हें डिनर के लिए आमंत्रित किया और उन्हें जर्मनी की फौज में बड़े पद का ऑफर दिया और जर्मनी की ओर से हॉकी खेलने का न्योता दिया ।

    मगर ध्यानचंद ने हिटलर का ऑफर ठुकराते हुए उन्हें दो टूक जवाब देते हुए कहा था…….

    “हिंदुस्तान ही मेरा वतन है और मैं उसी के लिए आजीवन हॉकी खेलता रहूंगा।”

    29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद में जन्मे दुनिया के महानतम् खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंति पर हम उन्हें हार्दिक नमन् करते हैं और अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ! 

        ( रनबीर सिंह रमन के फेसबुक वॉल से )