​सलाह: शरीर में चर्बी से गांठ बन जाए तो घबराएं नहीं, लिपोमा घरेलू नुस्खे से हो सकता है ठीक 

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    गजे सिंह बिष्ट
    देहरादून, 07 अक्टूबर । अगर शरीर के किसी भाग में चर्बी जम जाने के कारण गांठ बन जाए तो घबराने की आवश्यकता नहीं हैै। इस बीमारी को लिपोमा या लाइपोमा कहा जाता है। लेकिन यह किसी तरह की लाइलाज बीमारी नहीं है। न ही यह कैंसर का रूप लेती है। शरीर में फैट सेल्स के बढ़ने के कारण, मसल और स्किन के बीच में ये फैट सेल्स ग्रो होकर चर्बी की गांठ बन जाते हैं। लिपोमा स्किन में होने वाली सबसे कॉमन ट्यूमर है। सारे लाइपोमा बेनाइन ट्यूमर होते हैं। ये कैंसर में नहीं बदलते और न इनमें दर्द होता है, न ही ये फैलते हैं। जबकि लाइपोसरकोमा एक कैंसरस कंडीशन है। एक प्रतिशत से भी कम लाइपोमा केसेज कन्वर्ट होकर लाइपोसरकोमा बनते हैं। लेकिन इनकी जांच करना जरूरी है।
    कई बार चोट लगने पर भी लाइपोमा उस जगह पर हो सकता है, जिस जगह पर चोट लगी है। इसका भी कोई ठोस सुबूत नहीं है पर आमतौर पर ऐसा देखा गया है। इसका एक कारण मेटाबालिक भी है। यदि कोलेस्ट्राल बढ़ रहा हो, डायबिटीज हो, मोटापा हो, आप एक्सरसाइज नहीं करते हों, ज्यादा चलते फिरते न हों, तो यह हो सकता है।
    हालांकि लाइपोमा क्या होता है, ये तो ज्ञात है। लेकिन इलाज की जानकारी भी जरूरी है। जैसा कि सभी जानते हैं कि लाइपोमा शरीर में गर्दन, चेहरा, पीठ, हाथ, पांव, पेट कहीं भी हो सकता है, ये शरीर के अंदर भी उग सकती हैं।
    एक बीमारी डेर्कम डिजीज होती है जिसमें शरीर में कई लाइपोमा हो जाते हैं। लाइपोमा छोटे, बड़े दोनों साइज के हो सकते हैं। लाइपोमा मर्दों में ज्यादा पाया जाता है। 100 लोगों में एक से दो लोगों को लाइपोमा की बीमारी रहती है।
    लाइपोमा का इलाज मुख्यतः सर्जरी है। इसमें चीरा लगाकर इसको निकाला जाता है। पिफर बायोप्सी के लिए भेजा जाता है।इसके अलावा इंजेक्शन भी दिया जाता है। बड़े लाइपोमा में लेजर से गांठ हटाई जाती है ताकि निशान न पड़ें।
    घरेलू उपचार –
    रोजाना खाली पेट ताजी हल्दी खाएं।
    खाली पेट 2 ग्राम हल्दी का पाउडर लें।
    कचनार की पेड़ की छाल किसी भी प्रकार की गांठ के लिए लाभदायक है। अगर शरीर में बहुत अधिक गांठे हैं तो शिला सिंदूर 4 ग्राम व प्रभाल पिष्टी 10 ग्राम के साथ मोती और गिलोय मिलाकर सात पूड़िया बना लें। फिर सुुबह शाम इस्तेमाल करें।