Home Home खुलासा: केंद्र सरकार पर वैक्सीनेशन में WHO की गाइडलाइंस की अनदेखी करने...

खुलासा: केंद्र सरकार पर वैक्सीनेशन में WHO की गाइडलाइंस की अनदेखी करने का आरोप

269
0

संवाद सहयोगी
नयी दिल्ली, 22 मई।

देश में वैक्सीन की भारी कमी को लेकर विपक्षी दलों के हमलों का सामना कर रही केंद्र सरकार को एक और झटका लगा है। खुद वैक्सीन बनाने वाले संस्थान ने केंद्र सरकार के रवैए पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, सीरम इंस्टीट्यूट के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुरेश जाधव ने कहा कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन के स्टॉक के बारे में जाने बगैर और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइन पर विचार किए बिना कई आयु वर्गों के टीकाकरण को इजाजत दे दी।

गौरतलब है कि इन दिनों देश में कोरोनावायरस से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान जारी है। कई राज्यों में टीके की किल्लत की खबरें भी सामने आ रही हैं। किल्लत की कमी को लेकर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की ओर से एक बड़ा खुलासा किया गया है। इंस्टीट्यूट के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुरेश जाधव ने कहा कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन के स्टॉक के बारे में जाने बगैर और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइन पर विचार किए बिना कई आयु वर्गों के टीकाकरण को इजाजत दे दी।
हील हेल्थ की ओर से आयोजित एक ई-समिट में सुरेश जाधव ने कहा कि देश को WHO के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए और इसी के अनुसार टीकाकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरूआत में 30 करोड़ लोगों को टीका लगाया जाना था, जिसके लिए 60 करोड़ खुराक की जरूरत थी। लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही सरकार ने 45 साल और फिर 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को टीका लगाने की इजाजत दे दी। सरकार ने यह जानते हुए मंजूरी दे दी कि इतनी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

जाधव ने कहा कि यह सबसे बड़ा सबक हमने सीखा था। हमें उत्पाद की उपलब्धता को ध्यान में रखना चाहिए और फिर उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि टीकाकरण जरूरी है, लेकिन टीका लगने के बाद भी लोग संक्रमण की चपेट में हैं। इसलिए लोगों को सावधान रहना चाहिए और कोरोना से बचाव नियमों का पालन करना चाहिए। हालांकि भारतीय वेरिएंट के डबल म्यूटेंट को बेअसर कर दिया गया है, फिर भी वेरिएंट टीकाकरण में समस्या पैदा कर सकते हैं।
कौन सा टीका बेहतर, ये कहना होगा जल्दबाजी
सुरेश जाधव ने आगे कहा, ‘जहां तक ​​​​वैक्सीन के चयन का सवाल है, सीडीसी और एनआईएच डेटा के अनुसार, जो भी वैक्सीन उपलब्ध है, उसे लिया जा सकता है। बशर्ते उसे नियामक निकाय द्वारा लाइसेंस दिया गया हो और यह कहना जल्दबाजी होगा कि कौन सा टीका प्रभावकारी है और कौन सा नहीं। सीरम इंस्टीट्यूट के अधिकारी जाधव के इस खुलासे के बाद केंद्र सरकार पर वैक्सीन संकट को लेकर हो रहे विपक्षी हमलों में और तेजी आ सकती है।