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दिल्ली की धरती डोलीः नोयडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद में घरोें से बाहर भागे लोग 

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संवाददाता
नई दिल्ली, 18 दिसंबर।

दिल्ली कुछ क्षेत्रों में एक बार फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए है। दिसंबर की शुरूआत में ही दिल्ली और एनसीआर में भूकंप से लोग दहल गये थे। वहीं अब एक बार फिर से गुरूवार की रात को भूकंप के झटकों ने लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर दिया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.2 थी और इसका केंद्र गुरुग्राम से 48 किलोमीटर दूर दक्षिण—पश्चिम में था। भूकंप के झटके गुरुवार को रात करीब 11.45 बजे महसूस किए गए।
इससे पहले 2 दिसंबर को तड़के दिल्ली—एनसीआर में हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। तब भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.7 थी। गाजियाबाद में भूकंप का केंद्र था। विदित हो कि इस साल दिल्ली—एनसीआर में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। अप्रैल के बाद दिल्ली—एनसीआर में इस बार 15 से ज्यादा बार भूकंप के झटके महसूस किए गए।

कुछ घंटे पहले राजस्थान में भी आया था भूकंप

दिल्ली—एनसीआर में आए भूकंप से कुछ घंटे पहले राजस्थान के सीकर जिले में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे। मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि सुबह 11 बजकर 26 मिनट पर सीकर में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.0 दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि भूकंप का केंद्र रींगस के आसपास जमीन से लगभग पांच किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
उल्लेखनीय है कि देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक पहले ही आशंका जता चुके हैं कि दिल्ली और उसके आसपास के इलाके में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है। भूकंप की निगरानी करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था द नेशनल सेंटर ऑफ सीसमोलॉजी ने बताया कि बीते कुछ महीनों में दिल्ली में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

आ सकता है बड़ा भूकंप
जवाहरलाल नेहरू सेंटर ऑफ एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च में प्रोफेसर सीपी राजेंद्रन ने आशंका जताई है कि दिल्ली—एनसीआर में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है। लेकिन ये कब आएगा और कितना ताकतवर होगा। ये कह पाना मुश्किल है। सीपी राजेंद्रन ने 2018 में एक स्टडी की थी। जिसके मुताबिक साल 1315 और 1440 के बीच भारत के भाटपुर से लेकर नेपाल के मोहाना खोला तक 600 किलोमीटर लंबी सीसमिक गैप बन गई थीण् यानी जमीन के अंदर एक बड़ा गैप बन गया हैण् यह एक सक्रिय भूकंपीय फॉल्ट है। इस गैप में आमतौर पर कोई हलचल नहीं दिखती। इस पर छोटे—छोटे झटके आते रहते हैं। पिछले 600—700 सालों से ये गैप शांत है लेकिन अब इस पर लगातार भूकंपीय दबाव बन रहा है। हो सकता है कि यह दबाव भूकंप के तौर पर सामने आए। अगर यहां से भूकंप आता है तो यह 8.5 तीव्रता तक हो सकता है। अगर दिल्ली—एनसीआर क्षेत्र में 8.5 तीव्रता का भूकंप आता है। तो तबाही भी बहुत ज्यादा होगी।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक जेएल गौतम ने बताया कि आज तक अभी तक ऐसी कोई तकनीकी नहीं बनी है जिससे पहले से इसके बारे में बताया जा सके। इसके आने के बाद तीव्रता का अंदाजा तो लगाया जा सकता है लेकिन पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने भूकंप आने वाले क्षेत्रों के 5 जोन में बांटा गया।जिसमें 5वां जोन सबसे खतरे में है और दिल्ली का इलाका चौथे जोन में आता है। उन्होंने बताया कि हिमालय के आसपास का इलाके में बड़े भूकंप आने का खतरा ज्यादा है क्योंकि वहां पर प्लेटें खिसक रही हैं। इसलिए हिंदुकुश पर्वत से लेकर उत्तर—पूर्व तक भूकंप का एक बड़ा खतरा है।