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आपदा: खतरे की जद में गौरा देवी का गांव, ग्रामीणों का प्रशासन पर अनदेखी करने का आरोप

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संवाददाता
गोपेश्वर, 21 जून। चिपको आंदोलन जननी गौरा देवी राणा की कर्मभूमि एवं पर्यावरण चेतना की अलख जगाने वाले रैणी गांव के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। पहाड़ों में हुई चार दिनों की लगातार बारिश ने यहां का भूगोल बदलना शुरू कर दिया है। हालात ये हैं कि भारी वर्षा के दौरान यहां के 13 परिवारों को स्कूल में शरण लेनी पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जगह जगह जमीन दरकने लगी है। लोगों के मकान भूस्खलन की चपेट में आ रहे हैं और गांव के लोग भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।  नीती-मलारी हाईवे के एक हिस्से के पूरी तरह ध्वस्त होने के बाद नई सड़क बनाने के लिए चार दिन पहले ही यहां गौरा देवी के स्मारक को विस्थापित करना पड़ा था। अब गांव के लोगों को विस्थापित करने की बारी आ गई है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी से हो रहे कटाव और धंस रही जमीन की वजह से 13 मकान पूरी तरह खतरे की जद में आ गए हैं। इन मकानों में रह रहे परिवारों को रैणी वल्ली के स्कूल में अस्थाई तौर पर ठहराया गया है।


ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्कूल में तो ठहरा दिया गया है, लेकिन उनके लिए खाने और बिस्तर तक का ठीक से इंतजाम नहीं किया गया है। गांव के बाकी लोग भी भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनकी आशंका है कि पता नहीं अब गांव का क्या होगा। डर है कि इस बरसात में उन्हें गांव छोड़कर कहीं और जाना पड़ सकता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि वे आपदा का शिकार हो जाएं। ऐसी तमाम तरह की आशंकाएं उन्हें चैन से नहीं रहने दे रही हैं। रैणी के सूरज सिंह राणा व बचन सिंह राणा सरकार और प्रशासन पर वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाते हुए  कहते हैं सरकार और प्रशासन से उन्ऊ सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, जो कभी पूरे नहीं होते हैं। उनका कहना है कि गांव वालों को समस्या का स्थाई समाधान चाहिए।  लेकिन  समस्या का हल  ढूंढ़ा नहीं जा रहा है। वो कहते हैं कि शासन का यही रवैया रहा तो  गांव वाले जल्दी ही बेघर हो जाएंगे। रैणी के ग्राम प्रधान भवान सिंह ने बताया कि तहसील प्रशासन ने आपदा प्रभावित परिवारों को रैणी वल्ली में ठहरा तो दिया है लेकिन उन्हें राहत के नाम पर केवल कुछ गद्दे दिए गए हैं। उनके लिए न ओढ़ने की व्यवस्था है और न खाने का ही पर्याप्त इंतजाम किया गया है। आपदा के ऐसे नाजुक हालात में गांव वालों की घोर अनदेखी की जा रही है।