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कोरोना: महामारी से बिगड़ रहे हालात को लेकर केंद्र व राज्य सरकार पर हमलावर हुई कांग्रेस  

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संंवाददाता
काशीपुर, 05 मई। 

कोराना महामारी के सामने लगभग पंगु हो चुके हैल्थ सिस्टम को लेकर केंद्र और उत्तराखंड की भाजपा सरकारें कांग्रेस के निशाने पर आ गई हैं। पार्टी ने मौजूदा बिगड़े हालात के लिए सरकार की कार्य क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं।  वरिष्ठ समाजसेवी एवं कांग्रेस नेत्री डॉ दीपिका गुड़िया आत्रेय ने कहा है कि पिछले एक साल से केंद्र व राज्य सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की। महामारी को गंभीरता से न लेने का  आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा है कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई विशेष कार्य नहीं किए, बल्कि जो वैक्सीन भारत में तैयार की गई थी उसे भी विदेशों में सप्लाई कर दिया गया। उसीके चलते आज देश में वैक्सीन की कमी खल रही है।

मीडिया को जारी एक बयान में कांग्रेस नेत्री ने कहा कि मौजूदा समय में देश में कोविड-19 वैक्सीन की मांग को पूरा करने की अत्यंत जरूरत है लेकिन इसमें भी केंद्र सरकार विफल साबित हो रही है।  उन्होंने आरोप लगाया कि देश में ना तो नए अस्पताल बनाने की शुरुआत की गई ना ही चिकित्सा से संबंधित अन्य उपकरण व दवाइयों के क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया। इसकी बजाय मोदी सरकार बंगाल में चुनावी जीत और  उत्तराखंड में  मुख्यमंत्री बदलने के सियासी खेल में व्यस्त रही। उसी का नतीजा है कि आज हम कोरोना की दूसरी लहर का मुकाबला करने में खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि देश में चल रही कोरोना की दूसरी लहर हर दिन विकराल होती जा रही है। पूरा देश इसकी चपेट में आ चुका है।  कोरोना महामारी  की दूसरी लहर जिस तरह से देश में फैल रही है उसके लिए भाजपा सरकार ही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि समय पर सरकारी व निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों को बेड व  ऑक्सीजन  ना मिलने से मरीजों की जान जा रही है। भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है।
उन्होंने कहा कि आज देश जिस स्थिति से गुज़र रहा है वो कम से कम कोरोना की दूसरी लहर में तो स्वीकार नहीं हो सकती। हाँ, अगर कोरोना की पहली लहर में यह सब होता तो एक बार को समझा जा सकता था कि देश इन अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए तैयार ही नहीं था। लेकिन आज? उन्होंने सरकार से पूछा है कि कहाँ गया वो इंफ्रास्ट्रक्चर, जो कोरोना की पहली लहर में खड़ा किया गया था? कहाँ गए वो कोविड के अस्पताल? कहाँ गए वो बड़े बड़े दावे? जब वैज्ञानिकों ने पहले से ही कोविड की दूसरी लहर की चेतावनी दे दी थी तो यह लापरवाही कैसे हो गई? आज अचानक देश बेड और ऑक्सीजन की कमी का सामना क्यों कर रहा है? उन्होंने कहा कि देश की जनता को अभी सबसे अधिक चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत है ताकि लोगों की जिंदगी को बचाया जा सके। डॉ गुड़िया ने सरकार से मांग की है कि सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों की स्थापना जल्द से जल्द की जाए, ताकि ऑक्सीजन की जानलेवा किल्लत खत्म हो और देश की जनता को तड़प तड़प कर मरने से बचाया जा सके।