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कोरोना संकट: वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम हरीश रावत की अपील और महत्वपूर्ण सुझाव

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संंवाददाता
देहरादून, 09 मई।

अपनी राजनीतिक सक्रियता और बेबाक बयानों के लिए चर्चाओं में बने रहने वाले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत कोरोना संकट के इस दौर में भी चुप नहीं बैठे हैं। जानलेवा महामारी को लेकर अपनी चिंताओं का इज़हार वे किसी न किसी तरीके से अक्सर करते ही रहते हैं। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अब अपने चिरपरिचित अन्दाज में सरकार को कई सुझाव दिए हैं। साथ ही जनता को कई मेडिसिन गुणों के पहाड़ी उत्पादों का सेवन करने को प्रेरित कर स्वयं इम्पोज्ड कर्फ्यू को अपनाने की अपील भी की है।
रावत कहते हैं-  ‘कोरोना के खिलाफ यह युद्ध है, इस युद्ध में प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका का निर्वहन करना पड़ता है, विपक्ष की भी अपनी भूमिका है। उत्तराखंड में भी विपक्ष, सरकार की कमियों को लेकर उनको दूर करने के लिए सार्वजनिक दबाव बना रहा है। इसे नकारात्मक कहना सत्तारूढ़ दल की छोटी सोच है, लोकतंत्र को समझने का उनका संक्रिण नजरिया है। उत्तराखंड में जागरूक समाज कोरोना संक्रमण की चेन न टूटने से चिंतित है, गाँव में संक्रमण का प्रसार इस चिंता को दुगना कर दे रहा है, संक्रमण ने 10 हजार प्रतिदिन का आंकड़ा छू लिया है। देहरादून, देश के 10 सर्वाधिक संक्रमित जनपदों में से एक है। पहाड़ के जिलों में भी संक्रमण की रफ्तार तेज होती जा रही है। मैं समझता हूँ कि तीरथ सरकार इसको विस्फोटक खतरे की चेतावनी मान कर कोई नई रणनीति बना रही होगी।’

अपनी अपील में हरदा कहते हैं- ‘राज्य के नागरिक के रूप में इस लड़ाई में हमारी भी भूमिका है। हम अपने ऊपर सेल्फ इंपोज्ड कर्फ्यू की बंदिश लगा लें अर्थात घर से बहार न निकलें, यदि दो बार घर से निकलना आवश्यक है तो एक ही बार निकलें। शादी-विवाह समारोह के निमंत्रण को अच्छे समय की बधाई के लिए नोट कर लें और इनमें जाना अभी छोड़ दें। यदि कोई परिवार शादी आदि समारोह को अच्छे समय के लिए स्थगित कर सकता है तो मैं उस परिवार का चरण वंदन करना चाहूँगा। हम एक काम और अपने हाथ में ले सकते हैं, वो है अपने संपर्क के लोगों को कोरोना के प्रारंभिक  लक्षणों की पहचान और उसके खिलाफ लड़ने के लिए क्या-क्या प्रारंभिक आवश्यकताएं हैं, उससे परिचित करवाने का। मेरे कहने का अर्थ यह है कि राज्य में दूर-दराज के अंचलों के गाँव तक लोगों को कोरोना से बचाव की आवश्यक जानकारी दी जानी चाहिए। कोरोना का फैलाव जिस तेजी से हो रहा है प्रत्येक सक्षम नागरिक को अपनी अपनी भूमिका तलाश कर लोगों की मदद व संक्रमण रोकने में सहयोग देने में जुटना ही पडे़गा। नये संक्रमित की जानकारी, सरकारी तंत्र तक पहुँचाना भी आवश्यक है। सरकार को अपने तंत्र को आदेशित करना चाहिए कि सूचना के आधार पर संक्रमित व्यक्ति को यथाशीघ्र उसके परिवार से अलग कर दिया जाय और चिकित्सा प्रारंभ होने से पहले उस तक कुछ बुनियादी दवाईयाँ पहुँचा दी जाय।’

हरदा कहते हैं-  ‘संक्रमित व्यक्ति, हॉस्पिटल में है तो उसके तिमरदारों को भी कोरोना संक्रमण अवरोधी छतरी के अंदर लाया जाना चाहिए, इस हेतू अस्पताल के उस क्षेत्र को जहाँ तिमरदार आते-जाते हैं, उसे निरंतर सैनिटाईज किया जाना चाहिए। सरकार का यथा संभव प्रयास होना चाहिए कि नये संभावित संक्रमितों को संक्रमित होने से यथा संभव रोका जाय। कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में छोटे और मझोले हॉस्पिटल्स को भी कोविड के खिलाफ जंग का सिपाही बनाया जाना चाहिए, इससे कोविड नामिक चिकित्साल्यों के ऊपर बढ़ते हुए दबाव को कम करने में सहायता मिलेगी। हमारे पास राज्य में  आशा वर्कर, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग का एक बड़ा ढांचा है, इस ढांचे को प्रभावी बनाने के लिए एक प्रोटोकॉल बनाकर इनका उपयोग करना चाहिए ताकि संक्रमित व्यक्ति की सूचना और उस संक्रमित व्यक्ति तक प्रारंभिक कोरोना संबंधित दवाईयाँ यथाशीघ्र पहुँच सकें। मैं, राज्य सरकार से यह भी आग्रह करना चाहूँगा कि कोरोना के मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करें। जिला स्तर पर जिलाधिकारी इस युद्ध में सेनापति की भूमिका अदा करें और सूचना एकत्रीकरण में अपने रेवेन्यू, पुलिस और ग्राम विकास तंत्र का उपयोग करें। जिलाधिकारियों के पास संक्रमण से लड़ने के लिए अनटाईड फंड उपलब्ध होना चाहिए।’

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आगे कहा है-  ‘मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य सचिव, इधर लगातार सुविधाओं, दवाईयों, ऑक्सीजन, कोरोना बिस्तरों आदि की संख्या में वृद्धि की जानकारी दे रहे हैं, इन सूचनाओं से मनोवैज्ञानिक शक्ति मिलती है, इसे निरंतर जारी रखें। यदि आज मुख्यमंत्री हल्द्वानी सेक्टर में 200 ही सही आईसीयू बेड बढ़ाने के प्रयासों का ब्यौरा दे दें तो उस क्षेत्र में व्याप्त चिंतायुक्त बेचैनी कुछ सीमा तक कम हो जायेगी। इसी प्रकार जाँच के लिए पहाड़ों और गाँवों में मोबाइल वैन और शहरी क्षेत्रों में टेस्टिंग बूथ स्थापित कर टेस्टिंग हेतु लग रही लंबी कतारों को कम किया जा सकता है। मैं एक बात स्पष्ट कर दूँ कि मैं सरकार द्वारा लागू किये गये कर्फ्यू या लॉकडाउन को आधे दिल से उठाया गया कदम मान रहा हूँ। हमें आलोचक न समझें। हम अपनी नागरिक भूमिका का भी निर्वहन करना चाहते हैं, चाहे उसके लिए हमें अपनी फेसबुक पोस्ट का इस्तमाल लोगों से दिन में कुछ समय पेट के बल लेटने, तिमुर ( तिमरू) के दाने चबाने व दतोण करने, भटवाणी और फांणू खाने और सब्जी में चैलाई, बेथुवा, कंडाली, पालक आदि का अधिक से अधिक उपयोग करने की सलाह देने तक ही सीमित क्यों न हो, तो मैं अपनी सलाहों के इस सिलसिले में मुख्यमंत्री व राज्य के वित्त एवं स्वास्थ्य सचिव को यह पूर्णतः वैचारिक सलाह देना चाहूँगा कि यदि संक्रमण के खिलाफ इस युद्ध को जीतना है तो समाज के कुछ ऐसे लोगों को छांटिये जिनकी आमदनी इस दौर में करीब-करीब नष्ट हो गई है, उन्हें जिंदा रहने के लिए कुछ लाईफ स्टाई फंड घोषित कीजिये और उन्हें नगद दीजिये।’