Home उत्तराखंड विवादास्पद: केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने किसानों को बताया ‘मवाली’

विवादास्पद: केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने किसानों को बताया ‘मवाली’

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किसानों ने कहा- ‘ हमारे द्वारा उगाया हुआ अन्न खाना छोड़ दें मंत्री

संवाद सहयोगी
दिल्ली, 22 जुलाई।

तीन कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन को छह महीने से ज्यादा समय हो गया है। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से किसान आंदोलन को समाप्त कराने के लिए किसी तरह के सार्थक वह सकारात्मक प्रयास नज़र नहीं आए पर बीजेपी व सरकार के छोटे से लेकर बड़े पदाधिकारियों ने सार्वजनिक मंचों से किसानों पर तरह तरह के आरोप लगाकर न केवल उन्हें बदनाम करने पर जोर लगाया बल्कि उनका मनोबल तोड़ने की भी कोशिशें जारी रखीं। सत्तारूढ़ भाजपा के ऐसे ही नेताओं में अब एक और नाम जुड़ गया है, जिसने न सिर्फ किसानों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया बल्कि उन पर विपक्षी दलों के इशारे पर चलने का आरोप मढ़ डाला। आज़ के हालात में उनके बयान को लेकर विवाद खड़ा होना लाजिमी था, सो यह नेता अब सरकार विरोधियों के निशाने पर हैं।

दरअसल, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में हाल ही में मंत्री बनाई गईं मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसानों को मवाली कह डाला है। उन्होंने कहा है कि जो प्रदर्शन कर रहे हैं वे किसान नहीं है। नई दिल्ली सीट से सांसद मीनाक्षी लेखी ने 26 जनवरी को लाल किले पर हुई हिंसा का जिक्र करते हुए यह भी कहा है कि प्रदर्शनकारियों का राजनीतिक एजेंडा है। मीनाक्षी लेखी के इस विवादित बयान को लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा मचने लगा है और कई यूजर्स लेखी के इस्तीफे की मांग करने लगे हैं। उधर, टिकैत ने मवाली कहे जाने पर कहा कि किसानों के लिए इस तरह की बात नहीं कहनी चाहिए।
पेगासस जासूसी को लेकर संसद में हुए हंगामे पर बीजेपी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने आईं मीनाक्षी लेखी ने एक सवाल के जवाब में कहा- ”सबसे पहले तो उन्हें किसान कहना बंद कीजिए, क्योंकि वे किसान नहीं है, वे षडयंत्रकारी लोगों के हत्थे चढ़े हुए कुछ लोग हैं, जो लगातार किसानों के नाम पर ये हरकतें कर रहे हैं। किसानों के पास समय नहीं है, जंतर-मंतर आकर बैठने का, वह अपने खेत में काम कर रहा है। ये आढ़तियों के द्वारा चढ़ाए गए लोग हैं, जो चाहते नहीं कि किसानों को फायदा मिले।”

भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने एक अन्य सवाल के जवाब में  कहा- ‘जो कुछ 26 जनवरी को हुआ वह शर्मनाक था, और विपक्ष द्वारा इस तरह की चीजों को बढ़ावा दिया गया।’ एक बार फिर जब पत्रकारों की ओर से किसानों को लेकर सवाल किया गया तो मीनाक्षी ने कहा- ”आपने फिर उन्हें किसान कहा, मवाली हैं वे।”

केंद्रीय मंत्री लेखी के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा- ”मवाली वे हैं, जो कुछ नहीं करते हैं। किसानों के लिए इस तरह की बात कहना ठीक नहीं है। हम किसान हैं, मवाली नहीं। किसान अन्नदाता हैं।” किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा, ”इस तरह का बयान 80 करोड़ किसानों का अपमान है। यदि हम मवाली हैं, मीनाक्षी लेखी को हमारे द्वारा उपजाए अनाज को खाना बंद कर देना चाहिए। उन्हें शर्म आनी चाहिए। हमने उनके बयान की आलोचना करते हुए ‘किसान संसद’ में प्रस्ताव पास किया है।”