Home उत्तराखंड एम्सः अंतर्राष्ट्रीय मंच आईएएमबीएसएस की पुस्तिका का विमोचन

एम्सः अंतर्राष्ट्रीय मंच आईएएमबीएसएस की पुस्तिका का विमोचन

184
0

सत्येंद्र सिंह चौहान
ऋषिकेश, 19 दिंसबर।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय मंच इंटिग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ मेडिकलए बेसिक एंड सोशल साइंटिस्ट (आईएएमबीएसएस) की पुस्तिका विमोचन किया गया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने विज्ञान, चिकित्सा एवं सामाजिक समरसता विषय पर व्याख्यानमाला प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में समरसता एवं एकीकृत होकर कार्य करने की इच्छा शक्तिदृढ़ होने से ही भारत को पुनः विश्वगुरू की पदवी प्राप्त हो सकती है। कार्यक्रम के तहत आईएएमबीएसएस की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में 35 लोगों ने महादान किया।
आईएएसबीएसएस की ओर से आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी व कार्यक्रम अध्यक्ष एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रविकांत ने अन्य अतिथियों के साथ संस्था की वार्षिक पुस्तिका का विधिवत विमोचन किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रविकांत ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में मेडिकल साइंस के साथ—साथ व्यवहारिक ज्ञान को भी सम्मिलित किया जाना नितांत आवश्यक है। जिससे चिकित्सक व आम व्यक्ति के मध्य संवादहीनता नहीं हो। उन्होंने कहा कि कम्यूनिकेशन स्किल के ज्ञान के बिना आप अपनी बात को सही तरीके से दूसरे व्यक्ति तक नहीं पहुंचा सकते। निदेशक एम्स पद्मश्री रवि कांत ने कहा कि विदेशों में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कम्यूनिकेशन स्किल को पाठ्यक्रम में प्रमुखता से शामिल किया गया है। जिसमें उत्तीर्ण होना अनिवार्य शर्त रखी गई है। लिहाजा चिकित्सक को आम व्यक्तियों व मरीजों में अपनी छाप छोड़ने के लिए व्यवहार कुशल होना ही चाहिए। एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने देश की उन्नति के लिए विज्ञान के साथ साथ तकनीकि के विषय पर ध्यान दिए जाने पर जोर दिया।


मुख्य अतिथि आरएसएस की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी ने कहा कि समाज में एक—दूसरे के प्रति भेदभाव से समाज बंट रहा है। लिहाजा इस मानसिकता को सामुहिक प्रयासों से समाप्त किया जाना चाहिए। तभी किसी समाज व राष्ट्र की उन्नति हो सकती है। कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के बाद विश्व के वैज्ञानिक मनुष्य में रोगों के बढ़ने के कारणों के साथ साथ इम्युनिटी डेवलपमेंट विषय पर शोधकार्य में जुटे हुए हैं। खासकर कोविड19 का दुनिया के मुकाबले भारत में कम असर के मद्देनजर यहां के खानण्पान पर खासतौर से अध्ययन कर रहे हैं। मुख्य अतिथि अशोक बेरी जी ने कहा कि शरीरए मन व बुद्धि के समन्वय के बिना हम जीवन में आगे नहीं बढ़ सकते हैं। उन्होंने सामाजिक उन्नति के लिए मन में भरे विद्वेष को समाप्त करने पर जोर दिया।
संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने आईएएमबीएसएस की समाज के विभिन्न वर्गों में समन्वय के प्रयासों की सराहना की और इसे अच्छी पहल बताया। कहा कि हमारे समाज को इस तरह के रचनात्मक प्रयासों की नितांत आवश्यकता है। तभी हम प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनिल जोशी, हंस फाउंडेशन के राज्य प्रभारी पदमेंद्र सिंह बिष्ट ने भी विचार रखे। समारोह में बताया गया कि आईएएमबीएसएस पिछले कई वर्षों से चिकित्सकों, वैज्ञानिकों एवं देश के नीति नियंताओं के मध्य एकीकृत होकर कार्य करने की भावना को उजागर करने को प्रयासरत है। संस्था द्वारा देश के सभी बड़े चिकित्सा संस्थानों एम्स दिल्ली, एम्स ऋषिकेश, एम्स भटिंडा, पीजीआई चंडीगढ़ एवं अन्य संस्थानों के चिकित्सकों को जोड़कर इस एकीकृत भाव को आयुर्विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाने के लिए प्रयासरत है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि अशोक बेरी व निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने संस्था की ओर से डा. मनिंदर, डा. अमित गुप्ता, डा. जितेंद्र गैरोला, डा. प्रमोद के अलावा संस्था के सदस्य संदीप, मिथलेश, अनमोल, अवधेश, सरोज भट्ट आदि को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एम्स की प्रो. सत्यावती राना तथा डा. बलराम आदि मौजूद रहे।