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एम्स: शरीर पर होने वाले घावों के उपचार विधि पर कार्यशाला, विशेषज्ञों ने बताए देखभाल के तरीक़े

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 सत्येंद्र सिंह चौहान                                               

ऋषिकेश, 26 मार्च।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओर से शरीर में किसी भी कारण से होने वाले वुंड (घाव) के उपचार विधि पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों ने नर्सिंग ऑफिसरों को घावों की देखभाल, उपचार एवं उन्हें ठीक करने के लिए अपनाई जाने वाली चिकित्सकीय प्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी दी।                                        शुक्रवार को संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत  की देखरेख में बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग द्वारा घावों पर कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने अपने संदेश में सभी विभागों से हैल्थ केयर वर्कर के ज्ञानवर्धन के लिए इस तरह की कार्यशालाओं के नियमित आयोजन के लिए प्रोत्साहित किया। कहा कि ऐसे आयोजनों से प्राप्त की गई दक्षता से रोगियों को लाभ मिलता है और वह जल्दी रोगमुक्त हो सकते हैं।                                              कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने इस आयोजन के लिए बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग को प्रोत्साहित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि विभाग नर्सिंग ऑफिसर्स को दक्ष बनाने के लिए आगे भी नियमिततौर पर इस तरह की उच्चस्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन करेगा।              बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. विशाल मागो ने कार्यशाला में नर्सिंग ऑफिसरों को घाव को साफ करने व उसे सूखा रखने के साथ साथ बेहतर इलाज के बारे में जानकारी दी। उन्होंने नर्सिंग ऑफिसर्स को ऐसे घाव जिनमें किसी कारणवश पस बन जाता है व जिससे वह गहरे हो जाते हैं, उन्हें बैक मशीन एवं हाईयर बेरिक ऑक्सीजन थैरेपी द्वारा सुखाने की विधि का प्रशिक्षण भी दिया।                                            कार्यशाला में प्लास्टिक सर्जरी विभाग की डा. मधुभरी वाथुल्या, डा. अक्षय कपूर, डा. मोहम्मद अल्ताफ मीर, डा. नीरज राव व कॉलेज ऑफ नर्सिंग की प्राचार्य डा. वसन्था कल्याणी ने भी व्याख्यान प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डा. समीर, डा. प्रवीन, डा. निशांक, डा. स्नेहा, डा. आनंद, डा. अंकुश आदि मौजूद थे।