रिएक्शन: हरदा के समर्थन में आगे आए अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा

रिएक्शन: हरदा के समर्थन में आगे आए अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा
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सिख समाज से की बात को यहीं समाप्त कर देने की अपील

संवाददाता
देहरादून, 04 सितंबर।
पंज प्यारे वाले अपने बयान को लेकर माफी मांगने के साथ ही गुरुद्वारे में सेवा तक कर चुके हरीश रावत के बयान पर जारी विरोधियों की ओछी राजनीति लोगों के गले नहीं उतर रही है। ऐसे में गुरुद्वारा श्री हेमकुण्ट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने विरोधियों की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए हरीश रावत को विनम्र स्वभाव का नेकदिल इंसान करार दिया है।

बिंद्रा का कहना है कि गत दिनों में पंजाब के कांग्रेस प्रभारी  हरीश रावत  की ओर से पत्रकारों से बात करते हुए सरदार नवजोत सिंह सिद्धू एवं उनके चार साथियों के लिये जो पंज प्यारों जैसा संबोधन दिया गया था, तभी उन्होंने अनजाने में कहे इन शब्दों के लिये क्षमा याचना भी कर ली थी। फिर भी उस बयान को अलग-अलग जगहों में कई राजनीतिक दलों के द्वारा अपने सियासी फायदे के लिए गलत ढंग से उछाला जा रहा है।

बिंद्रा के अनुसार, उनके गुरुद्वारा श्री हेमकुण्ट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के उपाध्यक्ष एवं  उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद पर रहते समय  हरीश रावत राज्य के मुख्यमंत्री थे। तब उन्हें रावत को नजदीक से देखने का अवसर मिला। वर्ष 2013 में उत्तराखण्ड राज्य में भारी वर्षा से आई बाढ़ के दौरान हरीश रावत के द्वारा श्री हेमकुण्ट साहिब के क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग के नवनिर्माण, क्षतिग्रस्त राजमार्ग, राष्ट्रीय मार्ग की मरम्मत के कार्यों के साथ साथ गोविंद घाट व गोविंद धाम तथा जोशीमठ में फंसे श्री हेमकुण्ट साहिब यात्रियों के लिये गए सभी कार्य प्रसंशनीय हैं, जिनको बड़े धैर्य व निष्पक्ष सेवाकार्य के भाव में निभाया गया। इसके साथ-साथ श्री हेमकुण्ट साहिब यात्रा को और सुखद बनाने के कार्यों को भी सेवा भावना से किया गया। अल्पसंख्यक आयोग के कार्यों में भी उनकी ओर से बड़ी फरादिली से सहयोग देने व मुश्किलों, उलझनों को सुलझाने, संवारने में बड़ा सहयोग मिलता रहा।


सरदार बिंद्रा ने कहा है कि जिला चंपावत उनकी जन्म स्थली है जहां श्री गुरुनानक देव जी के जीवन काल से जुड़े पावन श्री रीठा साहिब सुशोभित हैं तथा नानकमत्ता भी उनके नजदीक है जहां हरीश रावत अपने जीवन में दर्शन करते हुए जुड़े रहे हैं। अतः वे सिख सिद्धांतों व मर्यादा को भली-भांति पहचानते हैं। इसीलिए उनके द्वारा स्वयं ही गुरुघर की मर्यादा में रहते हुए सेवा करने व पश्चाताप करने का संकल्प लिया गया। सरदार बिंद्रा का कहना है कि रावत जी विनम्र व नेक स्वभाव के व्यक्ति हैं। सिख समुदाय व सिख धर्म के लिये उनके मन में श्रद्धा व सिख संगतों के मन में भी उनके लिये सत्कार का भाव है। ऐसे में उनकी ओर से भूल चूक से ही कहे गये शब्दों के लिये उनके द्वारा क्षमा याचना कर लेना व गुरुघर में सेवा करने का संकल्प लेना ही उनकी विनम्रता, संवेदनशीलता एवं सभी धर्मों के प्रति श्रद्धा व आदर का प्रतीक है। चुनाव के दिनों में हरीश रावत के विरोधियों द्वारा इस बात को तूल देकर उछालना व आगे बढ़ाते रहने को राजनीतिक उद्देश्य ही माना जा सकता है। सरदार बिंद्रा ने सभी से विनम्र निवेदन किया है कि इस बात को यहीं समाप्त कर दिया जाए एवं हरीश रावत द्वारा समाज के लिये किये गये कार्यों की सराहना करते हुए उनका सम्मान व आदर किया जाए। यही सिख सिद्धांतों के अनुकूल एवं समुदाय के हित में रहेगा।

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