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सोशल मीडिया:  चीन में लोगों को मारे जाने की वायरल खबर की असलियत….  यहां पढ़िए !  

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चीन की राजधानी बीजिंग से अनिल आजाद पाण्डेय की रिपोर्ट
बीजिंग। चीन सहित दुनिया भर में कोरोना वायरस की दहशत जारी है। इस वायरस की चपेट में आकर अब तक लगभग 1560 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि हज़ारों लोग संक्रमित हो गए हैं। चीन में पूरा सरकारी अमला व पब्लिक इस महामारी से निपटने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। वायरस के केंद्र हूबेई प्रांत के वूहान में स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि दूसरे प्रांतों व शहरों में भी सावधानी बरती जा रही है। लेकिन अधिकतर मौतें हूबई प्रांत, विशेषकर वूहान में ही हुई हैं। इस महामारी से मुकाबले के लिए अन्य जगहों से हज़ारों की तादाद में डॉक्टर, नर्स वहां पहुंच गये हैं। जबकि सेना ने भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कमान संभाल ली है।
इससे पहले वूहान में दो हज़ार से अधिक बिस्तर वाले दो बड़े अस्पतालों का निर्माण दस दिन के भीतर किया गया था। इसके अलावा कई छोटे-छोटे अस्पताल भी प्रभावित इलाकों में तैयार किए जा रहे हैं। ताकि वायरस के संक्रमण से जूझ रहे लोगों का समय पर इलाज किया जा सके।

इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) लगातार चीन और विश्व में वायरस की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उसने चीन द्वारा महामारी की रोकथाम में किए गए प्रयासों की सराहना की है। डब्ल्यूएचओ का एक दल आजकल चीन पहुंचकर हालात का जायजा भी ले रहा है।

वहीं दूसरी ओर इस चुनौती भरे वक्त में सोशल मीडिया के हाथ मानो कोई खजाना लग गया है। लगातार इस वायरस के बारे में सनसनीखेज़ खबरें पेश की जा रही हैं। एक सबसे बड़ी अफवाह, जिसमें बताया जा रहा है कि चीन सरकार 20 हज़ार नागरिकों को मारने वाली है। अब विश्व की एक प्रमुख न्यूज़ एजेंसी एएफपी के फैक्ट चेक ने भी चीन द्वारा सुप्रीम कोर्ट से 20 हज़ार लोगों को मारने की अनुमति लेने की खबर को निराधार बताया है। एएफपी का कहना है कि इस बात में कोई सच्चाई नहीं है, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसा कोई फैसला नहीं सुनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिस वेबसाइट पर चीनी नागरिकों को मारे जाने की खबर जारी हुई थी, उसमें पहले भी कई बार फेक खबरें छपती रही है।

वैसे चीन का आरोप है  कि उसके खिलाफ इस तरह का प्रचार कुछ पश्चिमी देशों द्वारा किया जा रहा है। वे चीन की छवि को खराब करना चाहते हैं, इसलिए ऐसी ख़बरों को प्रस्तुत किया जा रहा है।

इसके साथ ही चीन में लंबे अरसे से रहते हुए मैंने देखा है कि चीन की स्वास्थ्य व्यवस्था भारत व दुनिया के कई देशों से कितनी बेहतर है। वहीं चीन की सरकार कभी भी ऐसा काम नहीं करेगी, जिससे उसके नागरिकों का जीवन और स्वास्थ्य खतरे में पड़े। ज़रा सोचिए अगर चीन सरकार को अपने लोगों को कोई चिंता न होती तो क्या सरकार की ओर से हज़ारों डॉक्टरों, नर्सों और सैनिकों को हूबई प्रांत भेजा जाता ? क्या दस दिन के भीतर दो हज़ार से अधिक बेड वाले अस्पतालों का निर्माण किया जाता ? क्या नए साल के जश्न के मौके पर लोगों को एक जगह से दूसरी जगह न जाने की हिदायत दी जाती। क्योंकि इस अवसर पर चीन को पर्यटन आदि से करोड़ों डॉलर की कमाई होती है।

अब आप खुद ही तय कीजिए कि सोशल मीडिया पर चल रही खबरें कितनी सही हैं। यह भी जानना होगा कि सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने वाले कितने लोग चीन जा चुके हैं और उन्होंने चीन के सिस्टम को करीबी से जाना है।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर चीन के बारे में किस तरह की अफवाह फैलायी जा रही है, इसका उदाहरण उस वीडियो से दिया जा सकता है, जिसमें चीनी पुलिस गोलीबारी करती हुई दिख रही है। आजकल वायरल हो रहे इस वीडियो में कहा जा रहा है कि पुलिस वायरस से प्रभावित लोगों को गोली मार रही है। 21 सेकंड के इस वीडियो में रिवॉल्वर के साथ तीन पुलिसकर्मियों को एक कार से उतरकर आवासीय कॉलोनी में घुसते हुए दिखाया गया है। इसी वीडियो के अगले हिस्से में दिख रहा है कि कुछ लोग घायल होकर ज़मीन पर पड़े हैं और उनको प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई को जानने के लिए चैनल सीजीटीएन की टीम स्थानीय पुलिस के मुख्यालय पहुंची और मामले की सच्चाई जानने की कोशिश की। इसके साथ ही सीजीटीएन ने स्थानीय लोगों से भी जानने की कोशिश की। जिसमें पता चला कि उक्त वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी वहीं के हैं, लेकिन वे लोगों को मारने नहीं बल्कि एक पागल कुत्ते से निपटने के लिए ऐसा कर रहे हैं। दरअसल लोगों ने अपने इलाके में एक पागल कुत्ते द्वारा आतंक मचाए जाने की शिकायत दर्ज की थी। जिस पर तीन पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और कुत्ते पर गोलियां चलायी और पुलिस ने पागल कुत्ते को मार गिराया।
शायद किसी व्यक्ति ने इस घटनाक्रम को वीडियो में कैद कर लिया और फिर दूसरी घटनाओं वाली क्लिप को इसके साथ जोड़कर वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। पड़ताल में सामने आया कि वीडियो का एक हिस्सा जरूर उक्त पुलिसकर्मियों का है। लेकिन दूसरा हिस्सा जिसमें कुछ लोग घायल हुए हैँ और उन्हें उपचार दिया जा रहा है। वह 29 जनवरी का हूबेई प्रांत में एक मोटरसाइकिल दुर्घटना की फुटेज़ है। जिसमें एक 15 वर्षीय किशोर अपने चचेरे भाई के साथ कहीं जा रहा था, तभी दुर्घटना का शिकार हो गया। सूचना पाकर स्थानीय अस्पताल के डॉक्टर वहां पहुंचे और प्राथमिक उपचार दिया। वह किशोर दुर्घटना में बुरी तरह से जख्मी हो गया था।
यह बताता है कि सोशल मीडिया पर आने वाली बहुत सी जानकारी सटीक नहीं होती। कुछ लोग इसे अफवाह और सनसनी फैलाने के हथियार के तौर पर भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
जहां हर कोई कोरोना वायरस की बात कर रहा है। इसी बीच खबर यह भी है कि अमेरिका में फैले इंफ्लुएंजा से इस सीज़न में अब तक 10 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं 2017-18 में भी अमेरिका में इंफ्लुएंजा से 61 हज़ार लोग मारे गए थे। ये आंकड़े अमेरिका के सेंटर फॉर डिज़ीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन द्वारा जारी किए गए हैं। क्या कभी आपने सुना कि अमेरिका के खिलाफ किसी देश ने ट्रेवल एडवायज़री जारी की हो। या अमेरिकी लोगों के साथ भेदभाव किया गया हो।
वही दूसरी तरफ जब से चीन में कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ, सोशल मीडिया पर मानो चीन के खिलाफ अभियान सा छिड़ गया है। ताकि चीन की छवि को खराब किया जाय, बिगाड़ा जाय। यहाँ तक कहा जा रहा है कि चीन ने हज़ारों लोगों को मार दिया है और तमाम लोगों को मारने की तैयारी है।
लेखक, चाइना मीडिया ग्रुप के वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले दस वर्षों से चीन में कार्यरत हैं। चीन से पहले भारत के प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्रों में भी काम कर चुके हैं। इसके साथ ही “हेलो चीन” पुस्तक के लेखक भी हैं।
        (   उत्तरा  न्यूज़ से साभार )