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दृष्टिपात : राज्य बनने के 19 सालों में हमने क्या खोया और क्या पाया है ?

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खष्टी बिष्ट
आज उत्तराखंड बने पूरे 19 साल हो गए हैं और हम 20वें साल में जा रहे हैं। इन 19 सालों में हमने क्या खोया क्या पाया। इस बारे में अपने विचार रखना चाहूंगी।
ऐसा नहीं कि हमने 19 सालों में कुछ नहीं पाया। लेकिन इस पाने के चक्कर में हमने बहुत कुछ खोया भी।
पहला उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां। जैसा कि आप सभी लोग जानते ही हैं, यहां पर वन क्षेत्र अधिक होने के कारण कृषि भूमि बहुत कम है । आज पहाड़ों से जो पलायन हो रहा है ,तराई की तरफ या फिर महानगरों की तरफ, बहुत दुखदाई सोचनीय विषय है।
पहाड़ों में हमारे छोटे छोटे सीढ़ीनुमा लहलहाते खेत आज वीरान हैं और घास व कंटीली झाड़ियों से पटे हुए हैं। पहाड़ों के सुंदर छोटे छोटे घर आज खंडहरों में तब्दील होते जा रहे हैं।
रोजगार के लिए पहाड़ का युवा अपने बूढ़े मां बाप को छोड़कर महानगरों की ओर निकल पड़े हैं। और बूढ़े मां बाप आज भी अकेले उन खंडहरों में अपने बच्चों का आने का इंतजार करते नजर आते हैं।
बात करते हैं पहाड़ की शिक्षा व्यवस्था की, यहां पर दुर्गम स्थानों पर सरकार ने विद्यालय तो खोले मगर उन विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं। विद्यालय शिक्षक विहीन हैं।
अब बात करते हैं स्वास्थ्य की। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरकार ने खोल तो दिए मगर उनमें एक अदद डॉक्टर तक नहीं है, फार्ममासिस्ट के भरोसे पहाड़ के अस्पताल चलते हैं।
सबसे कष्टकारी मुद्दा है स्थायी राजधानी का। जब से उत्तराखंड राज्य बना, यहां पर आज तक स्थाई राजधानी नहीं बन पाई है।इसका खामियाजा उत्तराखंड के आम जनमानस को भुगतना पड़ता है। कहने को तो यहां पर दो-दो विधानसभा भवन मौजूद हैं, तीसरी बनने जा रही है। सरकार की ठोस इच्छाशक्ति के ना होने की वजह से आज 20 साल के बाद  भी यहां पर स्थाई राजधानी नहीं बन पाई।
उत्तराखंड के पास कृषि योग्य भूमि का अभाव है। यहां पर अधिकांश भूभाग बनो से पटा हुआ है। और जो कृषि भूमि है वो भी‌ सिंचाई विहीन‌ है।
है।आखिरकार,  उत्तराखंड बनने के बाद हमने क्या पाया ?
ऐसा नहीं कि उत्तराखंड बनने के बाद हमने कुछ नहीं पाया।
पहला राजनीतिक दृष्टिकोण से उत्तराखंड बनने से पहले यहां पर जहां 10 या 12 विधायक हुआ करते थे,आज उत्तराखंड के ही 70 विधायक सत्ता में राज करते हैं। अधिकारी एवं कर्मचारियों को उत्तराखंड बनने के बाद उनके प्रमोशन में काफी उन्नति हुई है।शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है।उत्तराखंड में आज 32 विश्वविद्यालय हैं, जहां देश विदेश से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं।
उत्तराखंड बनने के बाद हमारे तीर्थ स्थानों में जैसे चार धाम, हरिद्वार कुंभ, अर्ध कुंभ इत्यादि स्थानों में अत्यधिक विकास हुआ है जिससे लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष उत्तराखंड आते हैं। एक करोड़ जनसंख्या वाले उत्तराखंड में आज प्रति वर्ष ढाई करोड़ पर्यटक पहुंच रहे हैं।
उत्तराखंड बनने के बाद हमारे राज्य में 22 मेडिकल कॉलेजों की स्थापना भी हुई है। यहां पर एम्स जैसे हॉस्पिटल की स्थापना हुई।
जिस वक्त उत्तराखंड राज्य बना उस वक्त हमारे यहां पर 60% विद्युत कनेक्शन थे। आज देखा जाए तो हर गांव बिजली से चमक रहा है। विद्युुतीकरण में लगभग 90% आज बढ़ोतरी हुई है।
इसी तरह उत्तराखंड राज्य बनने के समय हमारे यहां पर 19500 किलोमीटर सड़कें थी, आज 40000 किलोमीटर सड़कें बनी हैं।
उत्तराखंड बनते समय हमारे यहां पर 42% शौचालय थे, आज 80% शौचालय उपलब्ध हैं। तो ऐसा नहीं कि हमने खोया ही खोया है, पाया भी बहुत कुछ है। विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
उत्तराखंड बनने के बाद हर व्यक्ति की राजनीतिक पहुंच बढ़ी है।
सामाजिक पहुंच भी बढ़ी है।धार्मिक क्षेत्र में उन्नति हुई है।
हां, इतना कहना चाहूंगी कि हायर एजुकेशन में अभी उत्तराखंड पीछे है।
यह हमारा 19 सालों का चिंतन और नजरिया है।