Home उत्तराखंड भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे की 125 वीं जयंती मनाई

भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे की 125 वीं जयंती मनाई

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कोटद्वार- सुप्रसिद्ध गांधीवादी नेता एवं भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे की 125 वीं जयंती पर उन्हें याद किया गया। यहां से करीब 8 किमी दूर भाबर क्षेत्र में हल्दूखाता स्थित राजेश्वरी करुणा बोक्सा जनजाति बालिका विद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में वक्ताओं ने आचार्य विनोबा भावे के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। कण्वाश्रम ग्राम स्वराज समिति के अध्यक्ष पूरण सिंह रावत ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद 1950 के दशक में अपने भू-आंदोलन के दौरान आचार्य विनोबा भावे भाबर क्षेत्र के हल्दूखाता में आए थे। यहां वे भूमिहीन बोक्सा जनजाति के लोगों की दयनीय दशा को देखकर काफी द्रवित हुए थे।उसी दौरान वे सर्वोदयी सेवक स्व. मानसिंह रावत के साथ गढ़वाल में भू-आंदोलन के सिलसिले में भ्रमण पर निकले थे। इस यात्रा के दौरान भावे जी भूमिहीन लोगों के बीच में एक सच्चे गांधीवादी नेता के रूप में लोकप्रिय हुए थे। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र- छात्राओं व शिक्षकों ने महात्मा गांधी और विनोबा भावे के प्रिय भजनों का गायन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। सर्वोदयी सेवक एवं स्व. मानसिंह रावत की पत्नी शशिप्रभा रावत तथा रिटायर्ड प्रधानाचार्य विनोद चंद्र कुकरेती ने भी आचार्य विनोबा भावे के जीवन से जुड़े कई प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए उनके आदर्शों व सिद्धांतों को आज भी प्रासंगिक बताया। कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मंजू रावत, सुरेंद्र लाल आर्य,योगंबर सिंह रावत, दर्शन लाल चौधरी,नेत्र सिंह रावत,विनय रावत, शूरवीर खेतवाल, गोविंद डंडरियाल, विभा एवं ज्योति आदि भी उपस्थित थे।