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प्रशासन की नाकामी, नहीं लगी   विभागों की प्रदर्शनी

रूद्रप्रयाग। इसे जिला प्रशासन की उदासीनता ही कहा जा सकता है कि इस बार जागतोली सांस्कृतिक मेले में लोगों को सरकारी विभागों की प्रदर्शनी नहीं दिखाई दे रही है।  मेले में लगाए गए अधिकांश स्टाल खाली और वीरान नजर आ रहे हैं। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को आम जनमानस तक पहुँचाने के लिए भले ही सरकारें बहुत दम भरती हों, लेकिन रुद्रप्रयाग जिला  प्रशासन का इससे कोई सरोकार नहीं है। दशज्यूला काण्डई क्षेत्र के करीब दो दर्जन गाँवों की धार्मिक-सांस्कृतिक और लोक जीवन को संजोये रखने वाले जागतोली मेले में जिला प्रशासन की घोर उदासीनता देखी गई है। ज्ञात रहे  कि दशज्यूला क्षेत्र के जागतोली के विशाल क्रीड़ा मैदान में हर वर्ष नंदा अष्टमी पर मेले का आयोजन किया जाता आ रहा है। इस वर्ष मेला कमेटी द्वारा इसे और भव्य रूप दिया गया और इस मेले के आयोजन को एक दिन से बढ़ाकर तीन दिवसीय किया गया। मेला कमेटी द्वारा एक माह पूर्व से ही जिला प्रशासन को अवगत करवाया जा चुका था और मेले में विभिन्न सरकारी विभागों की प्रदर्शनी लगाये जाने का निवेदन किया गया, लेकिन मेले में पशुपालन विभाग की प्रदर्शनी के अलावा किसी भी विभाग द्वारा अपनी विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदर्शनी नहीं लगाई गई। करीब दो दर्जन गाँवों के ग्रामीणों का केन्द्र जागतोली मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं लेकिन सरकारी विभागों के खाली स्टाॅल देखकर वे निराश हो जाते हैं। 
प्रशासन की इस कार्यप्रणाली से ऐसा लगता है, मानो दिन रात बैठकों के दौर और पौधारोपण कार्यक्रमों में मशगूल अधिकारी सुदूरवर्ती ग्रामीण अँचलों में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को पहुँचाना मुनासिब नहीं समझते हैं। मेला कमेटी के अध्यक्ष जयवर्द्धन काण्डपाल, महासचिव कालिका काण्डपाल, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष लखपत सिंह भण्डारी सहित क्षेत्र के लोगों का साफ आरोप था कि पिछले एक माह से जिलाधिकारी को इस बाबत अवगत करवाया जा चुका है लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र की भारी उपेक्षा की जा रही है जो सरासर गलत है।