Home मीडिया मीडिया: महिला पत्रकार शांताश्री सरकार ने छोड़ा अर्णब का रिपब्लिक टीवी

मीडिया: महिला पत्रकार शांताश्री सरकार ने छोड़ा अर्णब का रिपब्लिक टीवी

27
0
सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में रिया चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ अंधाधुंध अभियान चला रहे अर्णब गोस्वामी को अब उनकी टीम से ही चुनौती मिल रही है। रिपब्लिक की रिपोर्टर शांताश्री सरकार ने चैनल से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने लिखा है कि जिस तरह रिया को कलंकित करने का अभियान चल रहा है, उससे एक बंगाली और महिला होने की वजह से वो आहत हैं। अब और बर्दाश्त करना संभव नहीं है। शांताश्री वैसे तो अभी नोटिस पीरियड में हैं (इस्तीफ़ा देने के एक महीने बाद तक काम करना होता है) लेकिन इस मामले को वे सोशल मीडिया पर ले आयी हैं। उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किये।

 

उन्होंने लिखा कि सुशांत के पक्के प्रशंसकों को याद रखना चाहिए कि अपने ब्वाय फ्रेंड के साथ ड्रग लेने का कोई आरोप रिया पर सुशांत के परिजनों ने नहीं लगाया। आरोप हत्या और पैसे हड़पे का था जिसकी जाँच अब भी जारी है। एक बंगाली और महिला बतौर मैं शर्मिंदा हूँ कि देश सत्य स्वीकार करने की क्षमता खो चुका है।

 

एक दूसरे ट्वीट में शांताश्री ने लिखा कि रिपब्लिक टीवी में पत्रकारिता की निश्चित ही मौत हो चुकी है। मुझे फ़ख़्र है कि मैंने अब तक जो भी ख़बरें की उनमें कोई पक्षपात नहीं था। लेकिन जब एक महिला को कलंकित करने के लिए अपनी आत्मा को बेचने का वक़्त आया, मैंने बर्दाश्त न करने का फ़ैसाल लिया।
शांता श्री ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि वह सोशल मीडिया में इस बात को सार्वजनिक कर रही है कि उसने नैतिक कारणों से रिपब्लिक टीवी छोड़ दिया है। अभी वह नोटिस पीरियड में है लेकिन जिस तरीक़े से रिया चक्रवर्ती को बदनाम करने के लिए रिपब्लिक टीवी आक्रामक अभियान छेड़े हुए है, उसके बाद चुप रहना मुश्किल था. यह वक़्त सच बोलने का है।
 रिया चक्रवर्ती को लेकर तूफ़ान खड़ा करके अर्णब गोस्वामी ने आज तक को पीछे छोड़ते हुए रिपब्लिक टीवी को टीआरपी रेस में नंबर एक बना दिया है, लेकिन सच और पत्रकारिता की बुनियादी मान्यताओं का क़त्ल भी हुआ है। उन्होंने टीवी चैनल को उन्माद फैलाने का ज़रिया बना लिया है।
 कुछ दिन पहले चैनल के जम्मू कश्मीर ब्यूरो चीफ तेजेंद्र सिंह सोढ़ी ने भी ऐसे ही तमाम आरोप लगाते हुए इस्तीफ़ा दिया था। उधर, महाराष्ट्र विधानसभा में अर्णब के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी पेश हुआ है जिसे चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया गया है।