Home उत्तराखंड जन्मदिवस पर विशेष: चिपको आंदोलन की जननी गौरा देवी

जन्मदिवस पर विशेष: चिपको आंदोलन की जननी गौरा देवी

204
0

                               चिपको आंदोलन की जननी गौरा देवी को उनके जन्म दिवस पर शत् शत् नमन।

नाम – गौरा देवीजन्म – 25 अक्टूबर 1925
जन्म स्थान – लाता, चमोली, उत्तराखंड, भारत
शिक्षा – 5वीं तक
पति – मेहरबान सिंह राणा
मृत्यु – 4 जुलाई, 1991

गौरा देवी का जन्म 25 अक्टूबर 1925 में उत्तराखंड के चमोली जिले के लाता गाँव में हुआ था. इन्होने 5वीं तक शिक्षा ग्रहण की हैं. इनका विवाह मेहरबान सिंह राणा से हुआ था. ये लोग जीवनयापन करने के लिए पशुपालन, ऊनी कारोबार और खेती किया करते थे. जीविका चलाने के लिए इन्हें तमाम तरह के कष्टों को सहना पड़ता था.

अलकनंदा में 1970 में प्रलयकारी बाढ़ आई, जिससे यहाँ के स्थानीय लोगो में बाढ़ को रोकने के प्रति जागरूकता बढ़ी और इस कार्य के लिये पर्यावरण नेता    चण्डी प्रसाद भट्ट ने पहल की. भारत-चीन युद्ध के बाद भारत सरकार को चमोली की सुध आई और यहाँ पर सैनिकों के लिए सुगम मार्ग बनाने के लिए पेड़ों की कटाई की शुरूआत हुई. बाढ़ से प्रभावित लोगों के हृदय में पेड़ों और पहाड़ों के प्रति संवेदना जागी और महिला मंगल दलों की स्थापना हुई. 1972 में गौरा देवी को रैणी गाँव की “महिला मंगल दल”का अध्यक्ष चुना गया और धीरे-धीरे हर गाँव में महिला मंगल दलों की स्थापना हुई और महिलाओं ने इसमें अपना भरपूर सहयोग दिया.

पेेेेड़ों को बचाने के लिए महिलाएं अपनी जान की परवाह किये बिना  ठेकेदारों से  जाती थी और उन्हें बन्दूक के द्वारा धमकी और अन्य कई अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था. पर वो पीछे नहीं हटीं. गौरा देवी के अद्भुत साहस से इन इन महिलाओं में भी शक्ति का संचार हुआ और महिलाएं पेड़ों से चिपक गई और कहा कि इन पेड़ों के साथ हमें भी काट लो. महिलाओं ने पुलों को तोड़ दिया और जंगल में जाने के रास्तों पर खुद तैनात हो गई.

इस आन्दोलन ने वन प्रेमियों और वैज्ञानिकों के साथ सरकार का भी ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया और सरकार के द्वारा डॉ. वीरेन्द्र की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया. जांच के बाद पाया गया कि रैंणी के जंगल के साथ ही अलकनन्दा में बांई ओर मिलने वाली समस्त नदियों ऋषिगंगा, पातालगंगा, गरुड़गंगा, विरही और नन्दाकिनी के जल ग्रहण क्षेत्रों और कुवारी पर्वत के जंगलों की सुरक्षा पर्यावरणीय दृष्टि से बहुत आवश्यक है। इस प्रकार से पर्यावरण के प्रति अतुलित प्रेम का प्रदर्शन करने और उसकी रक्षा के लिये अपनी जान को भी ताक पर रखकर गौरा देवी ने जो अनुकरणीय कार्य किया, उसने उन्हें रैंणी गांव की गौरा देवी से चिपको वूमेन फ्राम इण्डिया बना दिया।